SEO Kya Hai? What is SEO in Hindi, कमाएं लाख रूपये महीना

SEO Kya Haiकैसे सीखा जा सकता है? इसे सीखने के क्या-क्या फायदे हैं? और कितना समय लगेगा सीखने में? दोस्तों अगर आप इन सभी सवालों के जवाब जानना चाहते हैं तो इस ब्लॉग पोस्ट को पूरा और ध्यान से पढ़ें ताकि आप यहाँ पे कोई भी जानकारी मिस न करें |

आज के इस आधुनिक संसार में इंटरनेट का क्रेज हम सभी के बीच बढ़ता जा रहा है। हर कोई इंटरनेट पर यही सवाल खोजता है कि "SEO Kya Hai" और हम इसे कैसे सीखें? यहाँ मै आप सभी को बता दूँ कि इंटरनेट और डिजिटल मार्केटिंग क्षेत्र इन तीन शब्दों "SEO" पर ही पूरी तरह से निर्भर करता है |

हर बड़ी कंपनी आज इंटरनेट पर अपने प्रोडक्ट और उद्योग को बेचने कि लिए लाखों रूपये खर्च करती हैं और इंटरनेट कि दुनिया में तो यह शब्द (SEO) आपको बार बार सुनने को मिलता है | चलिए इंटरनेट कि इस हैरतअंगेज़ टेक्नोलॉजी को थोड़ा करीब से देखें |

SEO Kya Hai? On-Page, Off-Page SEO क्या है? पूरी जानकारी सरल भाषा में            

       
SEO Kya Hai

वैसे तो SEO में ऐसी बहुत सी छोटी छोटी चीज़ें हैं सो सीखने वाली हैं। आप ये कह सकते हो की जितना आप SEO की गहराई में जाते जाएंगे वैसे वैसे ही आपके सामने नयी चीज़ें आती चली जाएंगी | सो इस पोस्ट में मै  आप से वही चीज़ें शेयर करूँगा जो आपके लिए जानना बहुत जरुरी है।

SEO Full Form, Definition in Hindi ( SEO की परिभाषा)


परिभाषा (Definition): दोस्तों सबसे पहले यहाँ पे बात कर लेते हैं सो की फुल फॉर्म। SEO का फुल फॉर्म होता है:- "Search Engine Optimization" और परिभाषा यानी की इसकी अगर हम Definition की बात करें तो वो कुछ इस तरह है:

Search Engine Optimization (SEO) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे गूगल सर्च इंजन (Google Search Engine) द्वारा निर्देशित नियमो का पालन करके किसी वेबसाइट को गूगल के पहले पेज पर रैंक किया जा सके ताकि उस वेबसाइट पर ज्यादा से ज्यादा लोग आएं और उस वेबसाइट (Website) पर प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को खरीद सके            
  
उदहारण के तौर पर (For Example) : Google पर जब आप कुछ सर्च करते हैं तो पहले पेज पर आपको टॉप १० वेब्सीटेस शो होती हैं जो की गूगल द्वारा बनाये गए पेजरैंक अल्गोरिथम के अनुसार रैंक करती है |

उदहारण के तौर पर मैंने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया जिसमे ये बताया गया है की जब भी आप कुछ सर्च करते हो गूगल पर तो कुछ इस तरह से रिजल्ट आपको वहां दिखाई देंगे |

Diagram: 1
   

SEO करना क्यों जरुरी है?


SEO की परिभाषा पढ़ कर आप सभी को यहाँ पे थोड़ा अंदाज़ा तो ज़रूर हो गया होगा की SEO Kya Haiअब किसी भी वेबसाइट का सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन करना क्यों ज़रूरी है? ये हम यहाँ जानेंगे |

फ्रेंड्स जब आप गूगल पर कोई चीज़ सर्च करते हैं तो आपके सामने गूगल के फर्स्ट पेज पर कुछ चुनिंदा Websites ही सामने आती हैं और टॉप 10 Websites ही वहां पे दिखाई देती हैं |

क्या आपने कभी सोचा है की जो आप जानकारी गूगल पर सर्च कर रहे हैं वो जानकारी लाखों लोगों ने अपनी Websites या ब्लॉग पर डाली होती है फिर भी आपको टॉप रिजल्ट्स में कुछ ख़ास Websites ही दिखती है | ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि उन्होंने अपनी website का Search engine Optimization बहुत ही अच्छे तरीके से किया होता है |

ध्यान दें:

1. इसलिए जब भी आप अपना एक ब्लॉग (Blog) या वेबसाइट बनाएं तो जो आर्टिकल्स आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर लिखते हैं उनका SEO जरूर करें |

2. वेबसाइट पर कुछ भी कंटेंट डालने से पहले कीवर्ड रिसर्च (Keyword Research) भी जरूर करें |
3. SEO करने से पहले HTML जरूर सीखें जो की आपको SEO की टेक्निकल चीज़ें समझने में मदद करेगा |

SEO सीखने के फायदे (Benefits)


1. अगर आपका एक पर्सनल ब्लॉग है तो आप अपनी वेबसाइट पर गूगल के एड्स लगा कर लाखों रुपया महीना कमा सकते हैं | 

2. आप किसी और के बिज़नेस के लिए उसके लिये एक वेबसाइट बना कर उसका सो करके काफी अच्छा पैसा महीना ले सकते हैं |  

3. सो करने के बाद अगर आप की वेबसाइट गूगल के टॉप पर आ जाती है तो आप दूसरे लोगों का बिज़नेस अपनी वेबसाइट पर प्रमोट करके उनसे हर महीने मोती रकम ले सकते हैं |

कितना टाइम लगता है वेबसाइट रैंक होने में ?

दोस्तों कोई भी वेबसाइट किसी भी कीवर्ड पर रैंक करने में दो से ढाई महीने ले लेती है | तो चलिए यहाँ पे जान लेते हैं की सो कितने प्रकार का होता है?

SEO कितने तरह का होता है? (Types of SEO) 


SEO के मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है On-Page SEO और Off-Page SEO | इन दोनों के बारे में हम गहराई से पढ़ेंगे |
     

1. On-Page SEO Kya Hai?


बहुत काम लोग शायद ये बात जानते होंगे कि एक वेबसाइट को रैंक करने में 60-70 प्रतिशत On-Page SEO का हाथ होता है। अगर आपकी वेबसाइट का On-Page SEO सही तरीके से किया गया है तो ये बहुत जल्दी गूगल में रैंक करेगी |

यहाँ On-Page SEO करने का मतलब है अपनी वेबसाइट को अच्छे ढंग से डिज़ाइन और डेवेलोप करना जैसे की वेबसाइट के Title, Meta Description और Content में सही Keywords का इस्तेमाल करने ताकि आपकी वेबसाइट गूगल में तेज़ी से रैंक हो |

On-Page SEO ऐसे करें


मै आप सभी को बता दूँ की On-Page SEO बहुत ही टेक्निकल और बारीकी वाला काम है इसलिए इसको हलके में न लें। कुछ आपको यहाँ पर टिप्स बताऊँगा जिससे की आप अपनी वेबसाइट का On-Page SEO अच्छे से कर पाएंगे |   

#1. टाइटल टैग (Title Tag)


टाइटल टैग किसी भी वेबसाइट को रैंक करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | हर एक वेबसाइट का अपने एक यूनिक टाइटल टैग होता है जो की गूगल को ये बताता है की आपकी वेबसाइट का कंटेंट किसके बारे में है |

उदहारण: वेबसाइट का टाइटल टैग कुछ इस तरह से दिखता है : <title>My Web Page </title>

टाइटल टैग कैसे चेक करें? : जब भी आपको किसी वेबसाइट का टाइटल टैग चेक करना हो तो आपने Ctrl+U दबाना है, आपको उसकी वेबसाइट के होम पेज की सारी Coding दिख जायेगी |

ध्यान दें: अपने टाइटल को 60-65 Characters का ही रखें क्यूंकि गूगल इससे ज्यादा Characters का टाइटल सर्च रिजल्ट में नहीं दिखाता |

#2. मेटा टैग (Meta Tag)


मेटा डिस्क्रिप्शन का सो में एक महत्वपूर्ण स्थान है जो आपकी वेबसाइट को गूगल सर्च इंजन में इंडेक्स करने में एक बहुत ही ज्यादा महत्वपुराण भूमिका निभाता है। इस लिए आप जब भी किसी वेबसाइट का SEO करते हैं तो Meta Tag अवश्य चेक करें |

वैसे तो मेटा टैग 4-5 तरह के होते है। मैंने दो मेटा टैग डिफाइन किये हैं जो की SEO के नज़रिये से काफी महत्वपूर्ण है |   

उदाहरण: <meta name="description" content="This is an Example"> (यह मेटा टैग आपके वेबपेज का डिस्क्रीप्शन बताता है की ब्लॉग किस टॉपिक पैर आधारित है, ध्यान रहे मेटा डिस्क्रिप्शन 150-160 characters का ही होना चाहिए )    

<meta name="keywords" content="what is seo, on-page seo, off-page seo"> ( यह मेटा टैग उन कीवर्ड्स को डिफाइन करता है जिनको आप गूगल में रैंक करना चाहते हैं

#3. वेबसाइट स्पीड और मोबाइल फ्रेंडली (Website Speed)


एक वेबसाइट की स्पीड SEO के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रोल अदा करती है | Search Engine Land की इस रिपोर्ट (Report) के मुताबिक अगर आपकी वेबसाइट की स्पीड कम है और आपकी वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली नहीं है तो गूगल की नज़र में आपकी वेबसाइट की रैंकिंग डाउन चली जायेगी |

इसलिए जितना हो सके कोशिश करें की आपकी वेबसाइट ज्यादा स्लो न हो | यहाँ पर मै आप सभी के साथ टिप्स शेयर कर रा हूँ जिससे आपकी वेबसाइट की जो स्पीड है वो काफी हद तक बढ़ जायेगी |

1. जब भी आप वेबसीटे बनाएं, चाहे ब्लॉगर उसे करें या वर्डप्रेस, हमेशा लाइट थीम को ही उसे करें |

उदाहरण (Example) : (Blogger Users) : अगर आप ब्लॉगर यूज़ करते हो तो उसमे एक थीम है जिसका नाम है "Fastest Blogger Theme" आपको बस गूगल पर ये टाइप करना है और फ्री में आपको ये थीम मिल जायेगी | ये ब्लॉगर की सबसे ज्यादा फ़ास्ट प्रोसेसिंग वाली थीम है और इसका रिस्पांस टाइम 1-2 seconds है जो के बाकी थीम्स के मुकाबले में काफी अच्छा है |

(WordPress Users): अगर आप वर्डप्रेस पैर ब्लॉग बना रहे है तो "Generate Press" थीम का इस्तेमाल कर सकते है और काम से काम प्लगिन्स का इस्तेमाल करें |

#4. रेस्पॉन्सिव वेबसाइट (Responsive Website)


1. एक शोध में पाया गया है कि 2015 के बाद से ही इंटरनेट एक्सेस मोबाइल devices पर ज्यादा बढ़ गया है| लगभग 80 प्रतिशत Websites आज मोबाइल devices पर ही चलाई जाती है |

2. हमेशा इस बात का ध्यान रखें की जब भी कोई वेबसाइट या ब्लॉग बनाएं भले  ही वो ब्लॉगर हो या वर्डप्रेस, हमेशा रेस्पॉन्सिव थीम ही का चुनाव करें। गूगल द्वारा निर्देशित नियमों में रेस्पॉन्सिव वेबसाइट का काफी महत्व है जो कि SEO की दृष्टि से भी काफी पॉजिटिव sign है |

3. अगर आप पूरी तरह एक कस्टमाइज और खुद से कोड करके एक वेबसाइट बनाते हैं तो Viewport Meta Tag अवश्य इस्तेमाल करें। जिससे की आपकी वेबसाइट सभी मोबाइल devices की स्क्रीन के अनुसार दिखेगी |

#5 URL (यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर)


आपके वेबसाइट में जो Web Pages होते हैं उनका URL जितना सिंपल हो सके उतना सिंपल रखें। URL ज्यादा लम्बा भी न हो |

उदाहरण (Example) : www.example.com/what-is-seo-and-on-page-seo-kaise-krein (गलत)

www.example.com/what-is-seo (सही)   

#6. इंटरनल लिंकिंग (Internal Linking)


मान लीजिये आपने कोई पोस्ट लिखी "Affiliate Marketing" के ऊपर और अब आप एफिलिएट मार्केटिंग से ही सम्बंधित एक और आर्टिकल लिख देते हैं तो आप उस आर्टिकल का लिंक अपनी पहली वाली पोस्ट के बीच में ही दे सकते हैं।

ध्यान रहे, जो पोस्ट आपने इंटरलिंक करनी है उसको हाईलाइट ज़रूर करें ताकि यूजर का ध्यान उस पोस्ट पैर अवश्य जाए | इस तरीके से आपकी दूसरी पोस्ट भी जल्दी रैंक हो जायेगी जो आपने बाद में लिखी होगी |

#7. ऑल्ट टैग (Alt Tag)


दोस्तों, जब कभी भी आप अपने ब्लॉग पर कोई पोस्ट लिखते हैं तो उसमे इमेजेज का भी बखूबी इस्तेमाल कीजिये और किसी की इमेज कॉपी न करें। खुद की डिज़ाइन की हुई इमेज ही अपनी पोस्ट में शेयर करे। इमेजेज आपको बहुत सारा ट्रैफिक देती हैं इसलिए ALT Tag लगाना न भूलें |

उदाहरण (Example) : <img alt="text">

#8. हैडिंग (Headings)


जब आप अपने ब्लॉग पैर कोई भी आर्टिकल लिखते हैं तो हैडिंग Tags का खास ख्याल रखें। किसी भी पोस्ट का टाइटल <h1> पहले से ही होता है। <h2>, <h3> हेडिंग्स टैग का प्रयोग बखूबी करें | 

अपने आर्टिकल में आप जितनी ज्यादा हेडिंग्स उसे करेंगे आपका आर्टिकल उतना जल्दी गूगल में रैंक करेगा |

#9. कीवर्ड्स (Keywords)


SEO के क्षेत्र में एक चीज़ कही जाती है की कहते हैं की "एक कीवर्ड आपकी ज़िन्दगी बदल सकता है"। बिना Keywords के SEO का कोई वजूद नहीं है |

कीवर्ड्स On-Page SEO में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। सोचिये अगर आपको पता ही नहीं की इंटरनेट पर लोग क्या जानना चाहते हैं तो उस जानकारी को ब्लॉग में डालने का क्या फायदा।

कीवर्ड रिसर्च के लिए आप ये टूल उसे कर सकते हैं : Ubbersuggest, Google Keyword Planner

अपने आर्टिकल में मैं कीवर्ड्स को बोल्ड ज़रूर करें ताकि गूगल को ये पता चले की आप किस कीवर्ड को रैंक करना चाहते हो | 

#10. कंटेंट (Content)


SEO के क्षेत्र में अक्सर ये बात कही जाती है के "Content is King" जिसका मतलब है की कंटेंट ही राजा है।  अगर आपके कंटेंट हाई क्वालिटी है तो गूगल उस चीज़ पर ज्यादा यकीन करता है।

अपना आर्टिकल काम से काम एक हज़ार शब्दों का ज़रूर लिखें और किसी का भी कंटेंट भूलकर भी कॉपी न करें| 

उम्मीद करता हूँ कि On-Page SEO Kya Hai ये आपको अच्छे से समझ आगया होगा तो चलिए शुरू करते हैं|   

Off-Page SEO Kya Hai?


परिभाषा (Definition): Off-Page SEO एक ऐसा प्रोसेस है जिसमे आपकी वेबसाइट की लोकप्रियता, विश्वसनीयता और उसकी सर्च इंजन रेपुटेशन को इंटरनेट पर पहले से लोकप्रिय वेब्सीटेस से लिंक किया जाता है और आपकी वेबसाइट को उन हाई अथॉरिटी वेबसाइट पर प्रमोट किया जाता है |
          
दोस्तों, जैसा कि मैंने आप सभी को पहले भी बताया था कि जहाँ किसी भी वेबसाइट को रैंक करने में 50-60 प्रतिशत On-Page SEO का काम होता है, वही Off-Page SEO का भी अपना एक महत्व है और 30-40% काम इसी का होता है ताकि आपकी वेबसाइट गूगल में दुगुनी तेज़ी से रैंक हो |

Off-Page SEO Kya Hai? यहाँ हम विस्तार से जानेंगे | Off-Page SEO वेबसाइट कि बहार का काम होता है | इसमें अलग अलग तरह की टेक्निक्स होती हैं जिसके बारे में हम यहाँ डिटेल में बात करेंगे |


Off-Page SEO करना क्यों ज़रूरी है?


आप सभी के मन में यहाँ ये सवाल जरूर होगा की ों-पेज सो करने से जब ५०-६० प्रतिशत काम जब हो जाता है तो ऑफ़ पेज सो करने की क्या ज़रुरत है? 

यहाँ पर मैं आप सभी को बता दूँ की गूगल का एक अल्गोरिथम (नियम) होता है जिसका नाम है "पेज रैंक अल्गोरिथम"। ये गूगल द्वारा निर्देशीत सर्च इंजन रैंकिंग के कुछ सख्त कानून होते हैं जो की गूगल लगभग हर महीने अपडेट करता है और इससे सभी वेब्सीटेस की रैंकिंग काफी प्रभावित होती है |

उदहारण (For Example) : मान लीजिये अगर आपकी वेबसाइट गूगल सर्च इंजन के पहले पेज पैर है तो वो सर्च इंजन रैंकिंग के नियमों के बदलने से दूसरे पेज पर चली जाती है | तो यहाँ पे जो मुख्य कारण ऑफ पेज सो करने का यही है |


Off-Page SEO करने के ये फायदे आप शायद ही जानते हों 


दोस्तों जहाँ एक तरफ आपको On-Page SEO करने का फायदा मिलता है वहां पे Off-Page SEO के भी हैरान  कर देने वाले फायदे हैं |

1. अगर आप हर रोज़ अपने ब्लॉग या वेबसाइट का Off-Page SEO करते हैं तो आपकी वेबसाइट की सर्च इंजन रैंकिंग बरकार रहती है |

उदहारण (For Example) : मान लीजिये अगर आपकी वेबसाइट गूगल के पहले पेज पर है और तीसरी पोजीशन पर है। अगर आप इसका Off-Page SEO रेगुलर करेंगे तो ये पहली पोजीशन पर ही बरकरार रहेगी बशर्ते उस कीवर्ड का कम्पटीशन कम हो जिसपर आप काम कर रहे हैं।


Off-Page SEO करने की Techniques


मै यहाँ पर कुछ महत्वपूर्ण Off-Page SEO की टेक्निक्स शेयर कर रहां हूँ जो की एक वेबसाइट को गूगल पर रैंक करने की नज़र से बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण और कारगर है |


1. सोशल मीडिया सबमिशन (Social Media Submission)


जब भी आप कोई नयी वेबसाइट बना लेते हैं तो सबसे पहले आप उस वेबसाइट की सभी पॉपुलर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रोफाइल पेज बना ले और वहां पर अपनी वेबसाइट का लिंक दाल दें।

Facebook, Twitter, Pinterest, Instagram और Tumblr जैसे विश्व प्रसिद्ध सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपने एकाउंट्स बनाएं |    


2. सोशल बुकमार्किंग (Social Bookmarking)


अपनी वेबसाइट के होम पेज और पोस्ट को सोशल बुकमार्किंग साइट्स पर सबमिट करें | आपने बस गूगल पर जा कर इस कीवर्ड को सर्च करना है जैसे कि "Social Bookmarking Sites List".


3. इंटरनेट फोरम सबमिशन (Internet Forum Submission)


दोस्तों, इंटरनेट फोरम (Internet Forum) एक तरह का डिस्कशन बोर्ड होता है। ये बोर्ड फेसबुक ग्रुप चैट कि तरह एक पब्लिक चैट बोर्ड होता है जहाँ पे बहुत सारे लोग कम्युनिटीज (ग्रुप्स) को ज्वाइन करके वहां पर अपने मैसेज पोस्ट करते हैं|

4. ब्लॉग कमेंटिंग (Blog Commenting)


कई बार ऐसा होता है कि आप इंटरनेट पर कोई आर्टिकल पढ़ रहे होते हैं और उसी टॉपिक पर आपने भी अपना आर्टिकल लिखा होता है।  आप वहां पर आर्टिकल के बारे में अपना सुझाव देकर वहां अपनी वेबसाइट का लिंक शेयर कर सकते हैं |


5. डायरेक्टरी सबमिशन (Directory Submission)


दोस्तों बात करूं अगर डायरेक्टरी सबमिशन की तो सबसे ज्यादा फायदा आपको डायरेक्टरी सबमिशन से होता है जो की आपकी वेबसाइट को थोड़े समय में ही गूगल सर्च इंजन में आसानी से रैंक कर देती है |

इसलिए जितना ज्यादा हो सके डायरेक्टरी पर अपनी वेबसाइट के लिंक ज़रूर सबमिट करें | आपने बस गूगल में जा कर सर्च करना है "Directory Submission List" और आपके सामने काफी सारी डायरेक्टरी सबमिशन लिस्ट आ जायेगी |


6. गेस्ट पोस्ट (Guest Post)


दोस्तों, एक गेस्ट पोस्ट (Guest Post) वो होती है जब आप किसी और की वेबसाइट के लिए एक आर्टिकल लिखते हैं और वहां जाकर आप अपनी वेबसाइट का लिंक भी दाल देते हैं जिससे आपकी वेबसाइट को काफी फायदा होता है |

वैसे तो लोग गेस्ट पोस्ट करने के लिए आपसे पैसे लेते हैं, लेकिन कई websites इंटरनेट पर ऐसी भी हैं जो आपको फ्री गेस्ट पोस्ट भी करने देती है |


7. सर्च इंजन सबमिशन (Search Engine Submission)


जब भी आप अपनी कोई नयी वेबसाइट बनाते हैं तो उसे प्रसिद्ध सर्च इंजन Google, Bing, Yahoo में ज़रूर सबमिट करें |


8. क्यू एंड अ (Q&A Website Submission)


Quora, Yahoo Answers, इस तरह की websites से आपको लाखों में वेबसाइट ट्रैफिक मिलता है और आपकी अच्छी खासी कमाई होती है |

इस तरह की वेबसाइट पर लोग आते हैं और अपनी प्रोब्लेम्स को प्रश्नो के रूप में वहां पोस्ट कर देते हैं। अगर आपको लगता है की आप उनकी प्रॉब्लम का उत्तर दे सकते हैं तो अपनी वेबसाइट पर उससे सम्बंधित आर्टिकल लिखकर वहां अपनी वेबसाइट का लिंक दे सकते हैं|

दोस्तों वैसे तो Off-Page SEO की और कई तरह की टेक्निक्स होती है। लेकिन मैंने यहाँ पे वह टेक्निक्स शेयर की हैं जो एक वेबसाइट को रैंक करने में मुख्य भूमिका निभाती है |       


SEO के कुछ टेक्निकल टर्म्स जो आपको जरूर जानने चाहिए 


जाहिर सी बात है आपका ज़रूर कोई ब्लॉग होगा और Basic SEO की आपको थोड़ी बहुत नॉलेज भी होगी। लेकिन SEO में कई ऐसी टेक्निकल टर्म्स भी है जो बहुत काम लोग जानते हैं |

वैसे तो सो में काफी सारी टर्म्स है और वो सभी आपके लिए जानना बहुत ज़रूरी है | लेकिन मै आपसे यहाँ पर कुछ मुख्य टेक्निकल टर्म्स शेयर कर रा हूँ जिससे आप SEO को और गहराई से समझ पाएंगे |


1. बैकलिंक (Backlinks)


एक बैकलिंक तब बनता है जब एक वेबसाइट किसी दूसरी वेबसाइट से लिंक होती है | बैकलिंक्स को हम इनबाउंड लिंक (Inbound Link) भी कहते हैं | किसी भी वेबसाइट को अगर आप जल्द से जल्द रैंक करना चाहते हैं तो आप जितने ज्यादा हो सके उसके बैकलिंक्स बनाएं |

ये दो प्रकार के होते हैं:- Do follow और No Follow

2. आर्गेनिक रिजल्ट (Organic Result)


SEO में मुख्य रूप से दो प्रकार के सर्च रिजल्ट्स होते हैं, एक Organic और दूसरा In Organic. दोनों टर्म्स को आपको एक उदाहरण देकर समझाता हूँ |

1. Organic Result : ये तरीका फ्री तरीका होता है जिसमे आप वेबसाइट का सिर्फ SEO करके उसे रैंक करते हैं |

2. In Organic Result: इसमें एक तरह से गूगल पे पेड कम्पैग्न चलाया जाता है जिसमे हम किसी वेबसाइट को रैंक करने के लिए पैसे इन्वेस्ट करते हैं |


3. सर्प (SERP)


सर्प का फुल फॉर्म होता है Search Engine Result Page. जब हम गूगल पर कोई चीज़ सर्च करते हैं तो हमारे सामने लाखों की तादाद में सर्च रिजल्ट्स खुलते हैं जिसे हम SERP कहते हैं |


4. 404 Error


कई बार जब आप इंटरनेट पर किसी वेबसाइट का पेज ओपन करते हैं तो आपको ये 404 Error का पेज दिखा देता है |

ऐसा इस लिए होता है क्यूंकि जब कोई ब्लॉगर अपनी वेबसाइट में किसी वेबपेज को डिलीट कर  देता है लेकिन फिर भी वह पेज गूगल में इंडेक्स रह जाता है| 


5. रोबोट्स (Robots.txt)


Robots.txt एक तरह की फाइल होती है जिसे की डोमेन की किसी रुट फाइल में रखा जाता है।  ताकि इसके इस्तेमाल से सर्च बोट्स को सूचित किया जाए की वेबसाइट का पूरा Stucture कैसा है| 


6. पेज रैंक (Page Rank)


दोस्तों पेज रैंक और कुछ नहीं बल्कि गूगल का ही एक अल्गोरिथम है जो के ये अनुमान लगता है की पुरे वेब में किन किन वेबसाइट में कोण से महत्वपूर्ण पेजेज स्थित हैं      


7. कीवर्ड स्तुफ्फिंग (Keyword Stuffing)


अपने ब्लॉग आर्टिकल में कोई भी कीवर्ड अगर आप ज़रुरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तप इस प्रोसेस को Keyword Stuffing कहते है |


8. ब्रोकन लिंक (Broken link)


ब्रोकन लिंक का अगर हम हिंदी में मतलब निकाले तो बनता है "टुटा हुआ लिंक।  आपकी वेबसाइट में जब कोई ऐसा अनावश्यक पेज बन जाता है जो आपको सीधा एरर की और ले जाता है तो वो एक ब्रोकन लिंक मन जाता है।

ये लिंक्स आपकी वेबसाइट रैंकिंग को काफी ज्यादा प्रभावित करते हैं |


9. कीवर्ड डेंसिटी (Keyword Density)

आपके आर्टिकल में कोई कीवर्ड कितनी बार रिपीट हुआ है है उसे हम कीवर्ड डेंसिटी कहते हैं | सो की दृष्टि से देखा जाए तो आपके आर्टिकल में कीवर्ड डेंसिटी ३-४ प्रतिशत होनी चाहिए|


10. Sitemap


सितमप एक तरह की फाइल होती है जिसका एक्सटेंशन .xml होता है | जिसमे एक वेबसाइट के लगभग सभी वेब पेजेज का रिकॉर्ड होता है जो कि गूगल को बताता है कि वेबसाइट में जो फाइल्स होती हैं जैसे कि इमेजेज, कंटेंट ये सब कहाँ पर स्टोर है |

उदाहरण (Example) : www.abc.com/sitemap.xml    


SEO Kya Hai? हिंदी में


उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को ये सवाल कि सो क्या है अच्छी तरह से समझ आ गया होगा | 

अगर आप सभी का कोई और प्रश्न हो सो से सम्बंधित तो आप अपने सवाल कमेंट सेक्शन में जरूर पोस्ट करें और अगर आपको लगता है कि इस आर्टिकल में कोई जानकारी मिस है तो आप अपने कीमती सुझाव कमेंट में पोस्ट कर सकते हैं।